HomePunjabएडवोकेट चंदन पुरी की महत्वपूर्ण जनहित पहल को आयोग का सकारात्मक समर्थन

एडवोकेट चंदन पुरी की महत्वपूर्ण जनहित पहल को आयोग का सकारात्मक समर्थन

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पंजाब एवं चंडीगढ़ के सभी न्यायिक परिसरों में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का महत्वपूर्ण विषय उच्च न्यायालय के महापंजीयक के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत

कपूरथला: न्यायिक परिसरों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानवीय गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से एडवोकेट चंदन पुरी, कोर कमेटी सदस्य कपूरथला, मानवाधिकार आयोग पंजाब द्वारा उठाई गई महत्वपूर्ण जनहित पहल को पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ संघ राज्य क्षेत्र मानवाधिकार आयोग ने सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाया है।

एडवोकेट चंदन पुरी ने आयोग के समक्ष अपने निवेदन के माध्यम से यह महत्वपूर्ण विषय रखा कि पंजाब एवं चंडीगढ़ के सभी न्यायिक परिसरों में स्थायी, प्रभावी एवं सुलभ आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए। न्यायिक परिसर न्याय प्रदान करने के महत्वपूर्ण केंद्र होने के साथ-साथ ऐसे सार्वजनिक स्थान हैं, जहां प्रतिदिन न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, न्यायिक कर्मचारियों, पक्षकारों, पुलिस अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं तथा आम नागरिकों सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित होते हैं।

एडवोकेट चंदन पुरी ने अपने निवेदन में विशेष रूप से प्राथमिक उपचार एवं आपातकालीन चिकित्सा केंद्र, प्रशिक्षित चिकित्सा एवं सहायक चिकित्सा कर्मचारी, रोगी वाहन, ऑक्सीजन सुविधा, स्वचालित बाह्य हृदयाघात पुनर्जीवन यंत्र, स्ट्रेचर, व्हीलचेयर तथा अन्य आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि न्यायिक परिसर में किसी व्यक्ति को अचानक हृदयाघात, सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी अथवा अन्य गंभीर चिकित्सा आपातस्थिति उत्पन्न होने पर शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में तत्काल प्राथमिक उपचार, ऑक्सीजन, जीवनरक्षक उपकरण और प्रशिक्षित सहायता उपलब्ध होना किसी बहुमूल्य जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

एडवोकेट चंदन पुरी ने यह भी रेखांकित किया कि किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद व्यवस्था करने की अपेक्षा पहले से प्रभावी आपातकालीन व्यवस्था तैयार करना अधिक मानवीय, जिम्मेदार और दूरदर्शी दृष्टिकोण है। हजारों लोगों की दैनिक उपस्थिति वाले न्यायिक परिसरों में ऐसी व्यवस्था केवल प्रशासनिक सुविधा का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन, स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा की सुरक्षा से जुड़ा व्यापक जनहित का विषय है।

इस महत्वपूर्ण विषय की गंभीरता एवं व्यापकता को ध्यान में रखते हुए मानवाधिकार आयोग ने मामले को माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ के महापंजीयक के समक्ष विचारार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख किया है। यह पहल न्यायिक परिसरों को अधिक सुरक्षित, संवेदनशील, मानवीय एवं जनहितकारी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

एडवोकेट चंदन पुरी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी संस्था, विभाग अथवा न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करना नहीं है, बल्कि एक सकारात्मक, व्यावहारिक एवं दूरदर्शी सुझाव सामने रखना है, जिससे किसी भी आपातस्थिति में व्यक्ति को समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता प्राप्त हो सके।

उन्होंने कहा, “न्याय की तलाश में न्यायालय पहुंचने वाला प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, सुरक्षा और आवश्यक सहायता का अधिकारी है। न्यायिक परिसरों में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा किसी विशेष व्यक्ति या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि वहां आने वाले प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।”

एडवोकेट चंदन पुरी ने मानवाधिकार आयोग द्वारा इस महत्वपूर्ण जनहित के विषय को आगे विचारार्थ ले जाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि संबंधित स्तर पर इस सुझाव पर सकारात्मक विचार किया जाएगा और पंजाब तथा चंडीगढ़ के न्यायिक परिसरों में चरणबद्ध रूप से आवश्यक आपातकालीन चिकित्सा एवं प्राथमिक उपचार सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यवस्थित करने की दिशा में उचित कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह पहल किसी व्यक्तिगत लाभ या व्यक्तिगत मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक परिसरों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान से जुड़ी व्यापक जनहितकारी पहल है।

“समय पर चिकित्सा सहायता — बहुमूल्य जीवन की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम।”

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